सम्भूष्य वस्त्रभूषाभिः पूजान्ते तं च संस्तवेत्॥ ३२
evaṃ dīnavacaḥ procya vaktāraṃ cātha pūjayet|
sambhūṣya vastrabhūṣābhiḥ pūjānte taṃ ca saṃstavet|| 32
अर्थ
इस प्रकार दीन वचन कहकर फिर वक्ताका पूजन करे। उसे सुन्दर वस्त्राभूषणोंसे विभूषित करे और फिर पूजाके पश्चात् उसकी इस प्रकार स्तुति करे—॥ ३२॥✎ 1570
एवं दीनवचः प्रोच्य वक्तारं चाथ पूजयेत्।
सम्भूष्य वस्त्रभूषाभिः पूजान्ते तं च संस्तवेत्॥ ३२
इस प्रकार दीन वचन कहकर फिर वक्ताका पूजन करे। उसे सुन्दर वस्त्राभूषणोंसे विभूषित करे और फिर पूजाके पश्चात् उसकी इस प्रकार स्तुति करे—॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 73) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/6/32/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)