श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.34

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

तदग्रे नियमः पश्चात्कर्तव्यः श्रेयसे मुदा।

सप्तरात्रं यथाशक्‍त्या धारणीयः स एव हि॥ ३४

tadagre niyamaḥ paścātkartavyaḥ śreyase mudā|

saptarātraṃ yathāśaktyā dhāraṇīyaḥ sa eva hi|| 34

अर्थ

फिर अपने कल्याणके लिये प्रसन्‍नतापूर्वक उसके सामने नियम ग्रहण करे और सात दिनोंतक यथाशक्ति उसका पालन करे॥ ३४॥✎ 1570

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1570 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: प्रसन्‍नता-पूर्वक → प्रसन्‍नतापूर्वक

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