फिर अपने कल्याणके लिये प्रसन्नतापूर्वक उसके सामने नियम ग्रहण करे और सात दिनोंतक यथाशक्ति उसका पालन करे॥ ३४॥✎ 1570
तदग्रे नियमः पश्चात्कर्तव्यः श्रेयसे मुदा।
सप्तरात्रं यथाशक्त्या धारणीयः स एव हि॥ ३४
फिर अपने कल्याणके लिये प्रसन्नतापूर्वक उसके सामने नियम ग्रहण करे और सात दिनोंतक यथाशक्ति उसका पालन करे॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 73) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/6/34/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)