फिर ब्राह्मण, अन्य विष्णुभक्त एवं कीर्तन करनेवालोंको नमस्कार करके उनकी पूजा करे और उनकी आज्ञा पाकर स्वयं भी आसनपर बैठ जाय॥ ३६॥✎ 1570
ब्राह्मणान् वैष्णवांश्चान्यांस्तथा कीर्तनकारिणः।
नत्वा सम्पूज्य दत्ताज्ञः स्वयमासनमाविशेत्॥ ३६
फिर ब्राह्मण, अन्य विष्णुभक्त एवं कीर्तन करनेवालोंको नमस्कार करके उनकी पूजा करे और उनकी आज्ञा पाकर स्वयं भी आसनपर बैठ जाय॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 73) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/36/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)