देवर्षे! इन महीनोंमें भी भद्रा-व्यतीपात आदि कुयोगोंको सर्वथा त्याग देना चाहिये तथा दूसरे लोग जो उत्साही हों, उन्हें अपना सहायक बना लेना चाहिये॥ ४॥✎ 1270
मासानां विप्र हेयानि तानि त्याज्यानि सर्वथा।
सहायाश्चेतरे तत्र कर्तव्याः सोद्यमाश्च ये॥ ४
देवर्षे! इन महीनोंमें भी भद्रा-व्यतीपात आदि कुयोगोंको सर्वथा त्याग देना चाहिये तथा दूसरे लोग जो उत्साही हों, उन्हें अपना सहायक बना लेना चाहिये॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 71) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/6/4/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1270 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रीमद्भागवत-की → श्रीमद्भागवतकी