श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.43

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

भोजनं तु वरं मन्ये कथाश्रवणकारकम्।

नोपवासो वरः प्रोक्तः कथाविघ्नकरो यदि॥ ४३

bhojanaṃ tu varaṃ manye kathāśravaṇakārakam|

nopavāso varaḥ proktaḥ kathāvighnakaro yadi|| 43

अर्थ

मैं तो उपवासकी अपेक्षा भोजन करना अच्छा समझता हूँ, यदि वह कथाश्रवणमें सहायक हो। यदि उपवाससे श्रवणमें बाधा पहुँचती हो तो वह किसी कामका नहीं॥ ४३॥

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