श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.42

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

फलाहारेण वा भाव्यमेकभुक्तेन वा पुनः।

सुखसाध्यं भवेद्यत्तु कर्तव्यं श्रवणाय तत्॥ ४२

phalāhāreṇa vā bhāvyamekabhuktena vā punaḥ|

sukhasādhyaṃ bhavedyattu kartavyaṃ śravaṇāya tat|| 42

अर्थ

अथवा फलाहार या एक समय ही भोजन करे। जिससे जैसा नियम सुभीतेसे सध सके, उसीको कथाश्रवणके लिये ग्रहण करे॥ ४२॥

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