श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.58

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

जयशब्दं नमःशब्दं शङ्खशब्दं च कारयेत्।

विप्रेभ्यो याचकेभ्यश्‍च वित्तमन्‍नं च दीयताम्॥ ५८

jayaśabdaṃ namaḥśabdaṃ śaṅkhaśabdaṃ ca kārayet|

viprebhyo yācakebhyaśca vittamannaṃ ca dīyatām|| 58

अर्थ

जय-जयकार, नमस्कार और शंखध्वनिका घोष कराये तथा ब्राह्मण और याचकोंको धन और अन्‍न दे॥ ५८॥

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