श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.59

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

विरक्तश्चेद्भवेच्छ्रोता गीता वाच्या परेऽहनि।

गृहस्थश्चेत्तदा होमः कर्तव्यः कर्मशान्तये॥ ५९

viraktaścedbhavecchrotā gītā vācyā pare'hani|

gṛhasthaścettadā homaḥ kartavyaḥ karmaśāntaye|| 59

अर्थ

श्रोता विरक्त हो तो कर्मकी शान्तिके लिये दूसरे दिन गीतापाठ करे; गृहस्थ हो तो हवन करे॥ ५९॥

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