श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.60

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

प्रतिश्लोकं तु जुहुयाद्विधिना दशमस्य च।

पायसं मधु सर्पिश्‍च तिलान्‍नादिकसंयुतम्॥ ६०

pratiślokaṃ tu juhuyādvidhinā daśamasya ca|

pāyasaṃ madhu sarpiśca tilānnādikasaṃyutam|| 60

अर्थ

उस हवनमें दशमस्कन्धका एक-एक श्लोक पढ़कर विधिपूर्वक खीर, मधु, घृत, तिल और अन्‍नादि सामग्रियोंसे आहुति दे॥ ६०॥

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