॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.6.68
फलदं स्यात्पुराणं तु श्रीमद्भागवतं शुभम्।
धर्मकामार्थमोक्षाणां साधनं स्यान्न संशयः॥ ६८
phaladaṃ syātpurāṇaṃ tu śrīmadbhāgavataṃ śubham|
dharmakāmārthamokṣāṇāṃ sādhanaṃ syānna saṃśayaḥ|| 68
अर्थ
यों करनेसे वह बुद्धिमान् दाता जन्म-मरणके बन्धनोंसे मुक्त हो जाता है। यह सप्ताहपारायणकी विधि सब पापोंकी निवृत्ति करनेवाली है। इसका इस प्रकार ठीक-ठीक पालन करनेसे यह मंगलमय भागवतपुराण अभीष्ट फल प्रदान करता है तथा अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष—चारोंकी प्राप्तिका साधन हो जाता है—इसमें सन्देह नहीं॥ ६७-६८॥