देश-देशमें जो विरक्त वैष्णव और हरिकीर्तनके प्रेमी हों, उनके पास निमन्त्रणपत्र अवश्य भेजे। उसे लिखनेकी विधि इस प्रकार बतायी गयी है॥ ७॥✎ 1270
देशे देशे विरक्ता ये वैष्णवाः कीर्तनोत्सुकाः।
तेष्वेव पत्रं प्रेष्यं च तल्लेखनमितीरितम्॥ ७
देश-देशमें जो विरक्त वैष्णव और हरिकीर्तनके प्रेमी हों, उनके पास निमन्त्रणपत्र अवश्य भेजे। उसे लिखनेकी विधि इस प्रकार बतायी गयी है॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 71) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/7/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1270 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रीमद्भागवत-की → श्रीमद्भागवतकी