श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.7

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

देशे देशे विरक्ता ये वैष्णवाः कीर्तनोत्सुकाः।

तेष्वेव पत्रं प्रेष्यं च तल्लेखनमितीरितम्॥ ७

deśe deśe viraktā ye vaiṣṇavāḥ kīrtanotsukāḥ|

teṣveva patraṃ preṣyaṃ ca tallekhanamitīritam|| 7

अर्थ

देश-देशमें जो विरक्त वैष्णव और हरिकीर्तनके प्रेमी हों, उनके पास निमन्त्रणपत्र अवश्य भेजे। उसे लिखनेकी विधि इस प्रकार बतायी गयी है॥ ७॥✎ 1270

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1270 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रीमद्भागवत-की → श्रीमद्भागवतकी

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