श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.8

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

सतां समाजो भविता सप्तरात्रं सुदुर्लभः।

अपूर्वरसरूपैव कथा चात्र भविष्यति॥ ८

satāṃ samājo bhavitā saptarātraṃ sudurlabhaḥ|

apūrvarasarūpaiva kathā cātra bhaviṣyati|| 8

अर्थ

‘महानुभावो! यहाँ सात दिनतक सत्पुरुषोंका बड़ा दुर्लभ समागम रहेगा और अपूर्व रसमयी श्रीमद्भागवतकी कथा होगी॥ ८॥✎ 1270

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1270 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रीमद्भागवत-की → श्रीमद्भागवतकी

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