श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.75

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

नारद उवाच

धन्योऽस्म्यनुगृहीतोऽस्मि भवद्भिः करुणापरैः।

अद्य मे भगवाल्ँलब्धः सर्वपापहरो हरिः॥ ७५

dhanyo'smyanugṛhīto'smi bhavadbhiḥ karuṇāparaiḥ|

adya me bhagavālm̐labdhaḥ sarvapāpaharo hariḥ|| 75

अर्थ

नारदजीने कहा—मैं धन्य हूँ, आपलोगोंने करुणा करके मुझे बड़ा ही अनुगृहीत किया है, आज मुझे सर्वपापहारी भगवान् श्रीहरिकी ही प्राप्ति हो गयी॥ ७५॥

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