सुरर्षये कदा ब्राह्मैश्छिन्धि मे संशयं त्विमम्॥ ९३
śukenoktaṃ kadā rājñe gokarṇena kadā punaḥ|
surarṣaye kadā brāhmaiśchindhi me saṃśayaṃ tvimam|| 93
अर्थ
शौनकजीने पूछा—सूतजी! शुकदेवजीने राजा परीक्षित्को, गोकर्णने धुन्धुकारीको और सनकादिने नारदजीको किस-किस समय यह ग्रन्थ सुनाया था—मेरा यह संशय दूर कीजिये!॥ ९३॥
शुकेनोक्तं कदा राज्ञे गोकर्णेन कदा पुनः।
सुरर्षये कदा ब्राह्मैश्छिन्धि मे संशयं त्विमम्॥ ९३
शौनकजीने पूछा—सूतजी! शुकदेवजीने राजा परीक्षित्को, गोकर्णने धुन्धुकारीको और सनकादिने नारदजीको किस-किस समय यह ग्रन्थ सुनाया था—मेरा यह संशय दूर कीजिये!॥ ९३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.93 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 79) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/93/