॥ श्रीहरिः ॥
आकृष्णनिर्गमात्त्रिंशद्वर्षाधिकगते कलौ।
नवमीतो नभस्ये च कथारम्भं शुकोऽकरोत्॥ ९४
ākṛṣṇanirgamāttriṃśadvarṣādhikagate kalau|
navamīto nabhasye ca kathārambhaṃ śuko'karot|| 94
अर्थ
सूतजीने कहा—भगवान् श्रीकृष्णके स्वधामगमनके बाद कलियुगके तीस वर्षसे कुछ अधिक बीत जानेपर भाद्रपद मासकी शुक्ला नवमीको शुकदेवजीने कथा आरम्भ की थी॥ ९४॥
आकृष्णनिर्गमात्त्रिंशद्वर्षाधिकगते कलौ।
नवमीतो नभस्ये च कथारम्भं शुकोऽकरोत्॥ ९४
सूतजीने कहा—भगवान् श्रीकृष्णके स्वधामगमनके बाद कलियुगके तीस वर्षसे कुछ अधिक बीत जानेपर भाद्रपद मासकी शुक्ला नवमीको शुकदेवजीने कथा आरम्भ की थी॥ ९४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.94 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 79) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/94/