श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.1.13

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

वज्रनाभ उवाच

राजन्‍नुचितमेतत्ते यदस्मासु प्रभाषसे।

त्वत्पित्रोपकृतश्‍चाहं धनुर्विद्याप्रदानतः॥ १३

rājannucitametatte yadasmāsu prabhāṣase|

tvatpitropakṛtaścāhaṃ dhanurvidyāpradānataḥ|| 13

अर्थ

वज्रनाभने कहा—‘महाराज! आप मुझसे जो कुछ कह रहे हैं, वह सर्वथा आपके अनुरूप है। आपके पिताने भी मुझे धनुर्वेदकी शिक्षा देकर मेरा महान् उपकार किया है॥ १३॥

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