श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.1.17

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

अथोटजं विहायाशु शाण्डिल्यः समुपागतः।

पूजितो वज्रनाभेन निषसादासनोत्तमे॥ १७

athoṭajaṃ vihāyāśu śāṇḍilyaḥ samupāgataḥ|

pūjito vajranābhena niṣasādāsanottame|| 17

अर्थ

परीक्षित‍्का सन्देश पाते ही महर्षि शाण्डिल्य अपनी कुटी छोड़कर वहाँ आ पहुँचे। वज्रनाभने विधिपूर्वक उनका स्वागत-सत्कार किया और वे एक ऊँचे आसनपर विराजमान हुए॥ १७॥

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