इस परब्रह्मस्वरूप व्रजधाममें नन्दनन्दन भगवान् श्रीकृष्णका निवास है। उनका एक-एक अंग सच्चिदानन्दस्वरूप है। वे आत्माराम और आप्तकाम हैं। प्रेमरसमें डूबे हुए रसिकजन ही उनका अनुभव करते हैं॥ २१॥
तस्मिन् नन्दात्मजः कृष्णः सदानन्दांगविग्रहः।
आत्मारामश्चाप्तकामः प्रेमाक्तैरनुभूयते॥ २१
इस परब्रह्मस्वरूप व्रजधाममें नन्दनन्दन भगवान् श्रीकृष्णका निवास है। उनका एक-एक अंग सच्चिदानन्दस्वरूप है। वे आत्माराम और आप्तकाम हैं। प्रेमरसमें डूबे हुए रसिकजन ही उनका अनुभव करते हैं॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.1.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 985) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/skanda/1/21/