॥ श्रीहरिः ॥
आत्मा तु राधिका तस्य तयैव रमणादसौ।
आत्मारामतया प्राज्ञैः प्रोच्यते गूढवेदिभिः॥ २२
ātmā tu rādhikā tasya tayaiva ramaṇādasau|
ātmārāmatayā prājñaiḥ procyate gūḍhavedibhiḥ|| 22
अर्थ
भगवान् श्रीकृष्णकी आत्मा हैं—राधिका; उनसे रमण करनेके कारण ही रहस्यरसके मर्मज्ञ ज्ञानी पुरुष उन्हें ‘आत्माराम’ कहते हैं॥ २२॥
आत्मा तु राधिका तस्य तयैव रमणादसौ।
आत्मारामतया प्राज्ञैः प्रोच्यते गूढवेदिभिः॥ २२
भगवान् श्रीकृष्णकी आत्मा हैं—राधिका; उनसे रमण करनेके कारण ही रहस्यरसके मर्मज्ञ ज्ञानी पुरुष उन्हें ‘आत्माराम’ कहते हैं॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.1.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 985) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/1/22/