श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.1.23

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

कामास्तु वांछितास्तस्य गावो गोपाश्‍च गोपिकाः।

नित्याः सर्वे विहाराद्या आप्तकामस्ततस्त्वयम्॥ २३

kāmāstu vāṃchitāstasya gāvo gopāśca gopikāḥ|

nityāḥ sarve vihārādyā āptakāmastatastvayam|| 23

अर्थ

‘काम’ शब्दका अर्थ है कामना—अभिलाषा; व्रजमें भगवान् श्रीकृष्णके वांछित पदार्थ हैं—गौएँ, ग्वालबाल, गोपियाँ और उनके साथ लीला-विहार आदि; वे सब-के-सब यहाँ नित्य प्राप्त हैं। इसीसे श्रीकृष्णको ‘आप्तकाम’ कहा गया है॥ २३॥

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