भगवान् श्रीकृष्णकी यह रहस्य-लीला प्रकृतिसे परे है। वे जिस समय प्रकृतिके साथ खेलने लगते हैं, उस समय दूसरे लोग भी उनकी लीलाका अनुभव करते हैं॥ २४॥
रहस्यं त्विदमेतस्य प्रकृतेः परमुच्यते।
प्रकृत्या खेलतस्तस्य लीलान्यैरनुभूयते॥ २४
भगवान् श्रीकृष्णकी यह रहस्य-लीला प्रकृतिसे परे है। वे जिस समय प्रकृतिके साथ खेलने लगते हैं, उस समय दूसरे लोग भी उनकी लीलाका अनुभव करते हैं॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.1.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 986) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/1/24/