श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.1.35

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

व्यावहारिकलीलास्थास्तत्र यन्‍नाधिकारिणः।

पश्यन्त्यत्रागतास्तस्मान्‍निर्जनत्वं समन्ततः॥ ३५

vyāvahārikalīlāsthāstatra yannādhikāriṇaḥ|

paśyantyatrāgatāstasmānnirjanatvaṃ samantataḥ|| 35

अर्थ

जो लोग व्यावहारिक लीलामें स्थित हैं, वे नित्यलीलाका दर्शन पानेके अधिकारी नहीं हैं; इसलिये यहाँ आनेवालोंको सब ओर निर्जन वन—सूना-ही-सूना दिखायी देता है; क्योंकि वे वास्तविक लीलामें स्थित भक्तजनोंको देख नहीं सकते॥ ३५॥✎ 908

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #908 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

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