श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.1.36

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तस्माच्चिन्ता न ते कार्या वज्रनाभ मदाज्ञया।

वासयात्र बहून् ग्रामान् संसिद्धिस्ते भविष्यति॥ ३६

tasmāccintā na te kāryā vajranābha madājñayā|

vāsayātra bahūn grāmān saṃsiddhiste bhaviṣyati|| 36

अर्थ

इसलिये वज्रनाभ! तुम्हें तनिक भी चिन्ता नहीं करनी चाहिये। तुम मेरी आज्ञासे यहाँ बहुत-से गाँव बसाओ; इससे निश्‍चय ही तुम्हारे मनोरथोंकी सिद्धि होगी॥ ३६॥

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