श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.1.5

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

महापथं गते राज्ञि परीक्षित् पृथिवीपतिः।

जगाम मथुरां विप्रा वज्रनाभदिदृक्षया॥ ५

mahāpathaṃ gate rājñi parīkṣit pṛthivīpatiḥ|

jagāma mathurāṃ viprā vajranābhadidṛkṣayā|| 5

अर्थ

शौनकादि ब्रह्मर्षियो! जब धर्मराज युधिष्ठिर आदि पाण्डवगण स्वर्गारोहणके लिये हिमालय चले गये, तब सम्राट् परीक्षित् एक दिन मथुरा गये। उनकी इस यात्राका उद्देश्य इतना ही था कि वहाँ चलकर वज्रनाभसे मिल-जुल आयें॥ ५॥

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