॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक POST.1.4
सूत उवाच
नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्।
देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत्॥ ४
nārāyaṇaṃ namaskṛtya naraṃ caiva narottamam|
devīṃ sarasvatīṃ vyāsaṃ tato jayamudīrayet|| 4
अर्थ
सूतजीने कहा—भगवान् नारायण, नरोत्तम नर, देवी सरस्वती और महर्षि व्यासको नमस्कार करके शुद्धचित्त होकर भगवत्तत्त्वको प्रकाशित करनेवाले इतिहासपुराणरूप ‘जय’ का उच्चारण करना चाहिये॥ ४॥