abhiṣicya gate rājñi tau kathaṃ kiṃ ca cakratuḥ|| 3
अर्थ
ऋषियोंने पूछा—सूतजी! धर्मराज युधिष्ठिर जब श्रीमथुरामण्डलमें अनिरुद्धनन्दन वज्रका और हस्तिनापुरमें अपने पौत्र परीक्षित्का राज्याभिषेक करके हिमालयपर चले गये, तब राजा वज्र और परीक्षित्ने कैसे-कैसे कौन-कौन-सा कार्य किया॥ ३॥
वज्रं श्रीमाथुरे देशे स्वपौत्रं हस्तिनापुरे।
अभिषिच्य गते राज्ञि तौ कथं किं च चक्रतुः॥ ३
ऋषियोंने पूछा—सूतजी! धर्मराज युधिष्ठिर जब श्रीमथुरामण्डलमें अनिरुद्धनन्दन वज्रका और हस्तिनापुरमें अपने पौत्र परीक्षित्का राज्याभिषेक करके हिमालयपर चले गये, तब राजा वज्र और परीक्षित्ने कैसे-कैसे कौन-कौन-सा कार्य किया॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.1.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 983) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/1/3/