वीर परीक्षित् भगवान् श्रीकृष्णके परम प्रेमी भक्त थे। उनका मन नित्य-निरन्तर आनन्दघन श्रीकृष्णचन्द्रमें ही रमता रहता था। उन्होंने भगवान् श्रीकृष्णके प्रपौत्र वज्रनाभका बड़े प्रेमसे आलिंगन किया। इसके बाद अन्तःपुरमें जाकर भगवान् श्रीकृष्णकी रोहिणी आदि पत्नियोंको नमस्कार किया॥ ७॥
परिष्वज्य स तं वीरः कृष्णैकगतमानसः।
रोहिण्याद्या हरेः पत्नीर्ववन्दायतनागतः॥ ७
वीर परीक्षित् भगवान् श्रीकृष्णके परम प्रेमी भक्त थे। उनका मन नित्य-निरन्तर आनन्दघन श्रीकृष्णचन्द्रमें ही रमता रहता था। उन्होंने भगवान् श्रीकृष्णके प्रपौत्र वज्रनाभका बड़े प्रेमसे आलिंगन किया। इसके बाद अन्तःपुरमें जाकर भगवान् श्रीकृष्णकी रोहिणी आदि पत्नियोंको नमस्कार किया॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.1.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 984) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/skanda/1/7/