श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.2.21

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

सूत उवाच

एवमुक्ता तु कालिन्दी प्रत्युवाचाथ तास्तथा।

स्मरन्ती कृष्णचन्द्रस्य कलाः षोडशरूपिणीः॥ २१

evamuktā tu kālindī pratyuvācātha tāstathā|

smarantī kṛṣṇacandrasya kalāḥ ṣoḍaśarūpiṇīḥ|| 21

अर्थ

सूतजी कहते हैं—श्रीकृष्णकी रानियोंने जब यमुनाजीसे इस प्रकार कहा, तब वे भगवान् श्रीकृष्णचन्द्रकी सोलह कलाओंका चिन्तन करती हुई उनसे कहने लगीं॥ २१॥✎ 1790

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1790 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: श्रीकृष्ण-चन्द्रकी → श्रीकृष्णचन्द्रकी

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