सूतजी कहते हैं—श्रीकृष्णकी रानियोंने जब यमुनाजीसे इस प्रकार कहा, तब वे भगवान् श्रीकृष्णचन्द्रकी सोलह कलाओंका चिन्तन करती हुई उनसे कहने लगीं॥ २१॥✎ 1790
एवमुक्ता तु कालिन्दी प्रत्युवाचाथ तास्तथा।
स्मरन्ती कृष्णचन्द्रस्य कलाः षोडशरूपिणीः॥ २१
सूतजी कहते हैं—श्रीकृष्णकी रानियोंने जब यमुनाजीसे इस प्रकार कहा, तब वे भगवान् श्रीकृष्णचन्द्रकी सोलह कलाओंका चिन्तन करती हुई उनसे कहने लगीं॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.2.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 991) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/skanda/2/21/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)