अट्ठाईसवें द्वापरके अन्तमें जब भगवान् श्रीकृष्ण स्वयं ही सामने प्रकट होकर अपनी मायाका पर्दा उठा लेते हैं, उस समय जीवोंको उनका प्रकाश प्राप्त होता है॥ १०॥
अष्टाविंशे द्वापरान्ते स्वयमेव यदा हरिः।
उत्सारयेन्निजां मायां तत्प्रकाशो भवेत्तदा॥ १०
अट्ठाईसवें द्वापरके अन्तमें जब भगवान् श्रीकृष्ण स्वयं ही सामने प्रकट होकर अपनी मायाका पर्दा उठा लेते हैं, उस समय जीवोंको उनका प्रकाश प्राप्त होता है॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 994) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/skanda/3/10/