श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.10

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

अष्टाविंशे द्वापरान्ते स्वयमेव यदा हरिः।

उत्सारयेन्‍निजां मायां तत्प्रकाशो भवेत्तदा॥ १०

aṣṭāviṃśe dvāparānte svayameva yadā hariḥ|

utsārayennijāṃ māyāṃ tatprakāśo bhavettadā|| 10

अर्थ

अट्ठाईसवें द्वापरके अन्तमें जब भगवान् श्रीकृष्ण स्वयं ही सामने प्रकट होकर अपनी मायाका पर्दा उठा लेते हैं, उस समय जीवोंको उनका प्रकाश प्राप्त होता है॥ १०॥

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