श्रीकृष्णका प्रकाश प्राप्त हुए बिना किसीको भी अपने स्वरूपका बोध नहीं हो सकता। जीवोंके अन्तः-करणमें जो श्रीकृष्णतत्त्वका प्रकाश है, उसपर सदा मायाका पर्दा पड़ा रहता है॥ ९॥
ऋते कृष्णप्रकाशं तु स्वात्मबोधो न कस्यचित्।
तत्प्रकाशस्तु जीवानां मायया पिहितः सदा॥ ९
श्रीकृष्णका प्रकाश प्राप्त हुए बिना किसीको भी अपने स्वरूपका बोध नहीं हो सकता। जीवोंके अन्तः-करणमें जो श्रीकृष्णतत्त्वका प्रकाश है, उसपर सदा मायाका पर्दा पड़ा रहता है॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 994) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/skanda/3/9/