ब्रह्माजीकी ही भाँति विष्णुने भी अपने अभीष्ट अर्थकी सिद्धिके लिये उन परमपुरुष परमात्मासे प्रार्थना की; क्योंकि उन पुरुषोत्तमने विष्णुको भी प्रजा-पालनरूप कर्ममें नियुक्त किया था॥ २८॥
विष्णुरप्यर्थयामास पुमांसं स्वार्थसिद्धये।
प्रजानां पालने पुंसा यदनेनापि कल्पितः॥ २८
ब्रह्माजीकी ही भाँति विष्णुने भी अपने अभीष्ट अर्थकी सिद्धिके लिये उन परमपुरुष परमात्मासे प्रार्थना की; क्योंकि उन पुरुषोत्तमने विष्णुको भी प्रजा-पालनरूप कर्ममें नियुक्त किया था॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 997) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/skanda/3/28/