श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.34

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

ततो विष्णुः प्रसन्‍नात्मा परमार्थकपालने।

समर्थोऽभूच्छ्रिया मासि मासि भागवतं स्मरन्॥ ३४

tato viṣṇuḥ prasannātmā paramārthakapālane|

samartho'bhūcchriyā māsi māsi bhāgavataṃ smaran|| 34

अर्थ

उस उपदेशसे विष्णुभगवान्‌का चित्त प्रसन्‍न हो गया और वे लक्ष्मीजीके साथ प्रत्येक मासमें श्रीमद्भागवतका चिन्तन करने लगे। इससे वे परमार्थका पालन और यथार्थरूपसे संसारकी रक्षा करनेमें समर्थ हुए॥ ३४॥

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