विष्णुकी यह प्रार्थना सुनकर आदिपुरुष श्रीकृष्णने उन्हें भी श्रीमद्भागवतका उपदेश किया और कहा—‘तुम अपने मनोरथकी सिद्धिके लिये इस श्रीमद्भागवत-शास्त्रका सदा पाठ किया करो’॥ ३३॥
तस्मा अपि पुमानाद्यः श्रीभागवतमादिशत्।
उवाच च पठस्वैनत्तव सर्वार्थसिद्धये॥ ३३
विष्णुकी यह प्रार्थना सुनकर आदिपुरुष श्रीकृष्णने उन्हें भी श्रीमद्भागवतका उपदेश किया और कहा—‘तुम अपने मनोरथकी सिद्धिके लिये इस श्रीमद्भागवत-शास्त्रका सदा पाठ किया करो’॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 997) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/33/