॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक POST.3.32
येऽपि मोक्षं न वाञ्छन्ति तान् कथं पालयाम्यहम्।
आत्मानं च श्रियं चापि पालयामि कथं वद॥ ३२
ye'pi mokṣaṃ na vāñchanti tān kathaṃ pālayāmyaham|
ātmānaṃ ca śriyaṃ cāpi pālayāmi kathaṃ vada|| 32
अर्थ
परन्तु जो लोग मोक्ष भी नहीं चाहते, उनका पालन मैं कैसे करूँगा—यह बात समझमें नहीं आती। इसके अतिरिक्त मैं अपनी तथा लक्ष्मीजीकी भी रक्षा कैसे कर सकूँगा, इसका उपाय भी बताइये॥ ३२॥