श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.4

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

द्वारकास्थेषु सर्वेषु धन्या एते न संशयः।

येषां व्रजनिवासाय पार्थमादिष्टवान् प्रभुः॥ ४

dvārakāstheṣu sarveṣu dhanyā ete na saṃśayaḥ|

yeṣāṃ vrajanivāsāya pārthamādiṣṭavān prabhuḥ|| 4

अर्थ

इसमें तनिक भी सन्देह नहीं कि समस्त द्वारकावासियोंमें ये लोग सबसे बढ़कर धन्य हैं, जिन्हें व्रजमें निवास करानेके लिये भगवान् श्रीकृष्णने अर्जुनको आज्ञा की थी॥ ४॥

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