श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.5

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

श्रीकृष्णस्य मनश्‍चन्द्रो राधास्यप्रभयान्वितः।

तद्विहारवनं गोभिर्मण्डयन् रोचते सदा॥ ५

śrīkṛṣṇasya manaścandro rādhāsyaprabhayānvitaḥ|

tadvihāravanaṃ gobhirmaṇḍayan rocate sadā|| 5

अर्थ

श्रीकृष्णका मनरूपी चन्द्रमा राधाके मुखकी प्रभारूप चाँदनीसे युक्त हो उनकी लीलाभूमि वृन्दावनको अपनी किरणोंसे सुशोभित करता हुआ यहाँ सदा प्रकाशमान रहता है॥ ५॥

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