श्रीकृष्णका मनरूपी चन्द्रमा राधाके मुखकी प्रभारूप चाँदनीसे युक्त हो उनकी लीलाभूमि वृन्दावनको अपनी किरणोंसे सुशोभित करता हुआ यहाँ सदा प्रकाशमान रहता है॥ ५॥
श्रीकृष्णस्य मनश्चन्द्रो राधास्यप्रभयान्वितः।
तद्विहारवनं गोभिर्मण्डयन् रोचते सदा॥ ५
श्रीकृष्णका मनरूपी चन्द्रमा राधाके मुखकी प्रभारूप चाँदनीसे युक्त हो उनकी लीलाभूमि वृन्दावनको अपनी किरणोंसे सुशोभित करता हुआ यहाँ सदा प्रकाशमान रहता है॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 994) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/skanda/3/5/