श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.44

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

ततस्तु वैष्णवीं रीतिं गृहीत्वा मासमात्रतः।

श्रीमद्भागवतास्वादो मया सम्यङ्निषेवितः॥ ४४

tatastu vaiṣṇavīṃ rītiṃ gṛhītvā māsamātrataḥ|

śrīmadbhāgavatāsvādo mayā samyaṅniṣevitaḥ|| 44

अर्थ

तत्पश्‍चात् भगवान् विष्णुकी रीति स्वीकार करके मैंने भी एक मासतक श्रीमद्भागवतकथाका भलीभाँति रसास्वादन किया॥ ४४॥

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