श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.50

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

तस्मान्‍नारदकुण्डेऽत्र तिष्ठामि स्वेच्छया सदा।

कृष्णप्रकाशो भक्तानां श्रीमद्भागवताद् भवेत्॥ ५०

tasmānnāradakuṇḍe'tra tiṣṭhāmi svecchayā sadā|

kṛṣṇaprakāśo bhaktānāṃ śrīmadbhāgavatād bhavet|| 50

अर्थ

उसीके बलसे यहाँ नारदकुण्डपर सदा स्वेच्छानुसार विराजमान रहता हूँ। भगवान्‌के भक्तोंको श्रीमद्भागवतके सेवनसे श्रीकृष्णतत्त्वका प्रकाश प्राप्त हो सकता है॥ ५०॥

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