श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.51

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

तदेषामपि कार्यार्थं श्रीमद्भागवतं त्वहम्।

प्रवक्ष्यामि सहायोऽत्र त्वयैवानुष्ठितो भवेत्॥ ५१

tadeṣāmapi kāryārthaṃ śrīmadbhāgavataṃ tvaham|

pravakṣyāmi sahāyo'tra tvayaivānuṣṭhito bhavet|| 51

अर्थ

इस कारण यहाँ उपस्थित हुए इन सभी भक्तजनोंके कार्यकी सिद्धिके लिये मैं श्रीमद्भागवतका पाठ करूँगा; किन्तु इस कार्यमें तुम्हें ही सहायता करनी पड़ेगी॥ ५१॥

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