श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.58

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

परीक्षिदुवाच

कलिं तु निग्रहीष्यामि तात ते वचसि स्थितः।

श्रीभागवतसम्प्राप्तिः कथं मम भविष्यति॥ ५८

kaliṃ tu nigrahīṣyāmi tāta te vacasi sthitaḥ|

śrībhāgavatasamprāptiḥ kathaṃ mama bhaviṣyati|| 58

अर्थ

राजा परीक्षित‍्ने कहा—हे तात! आपकी आज्ञाके अनुसार तत्पर होकर मैं कलियुगको तो अवश्य ही अपने वशमें करूँगा, मगर श्रीमद्भागवतकी प्राप्ति मुझे कैसे होगी॥ ५८॥

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