śrībhāgavatasamprāptiḥ kathaṃ mama bhaviṣyati|| 58
अर्थ
राजा परीक्षित्ने कहा—हे तात! आपकी आज्ञाके अनुसार तत्पर होकर मैं कलियुगको तो अवश्य ही अपने वशमें करूँगा, मगर श्रीमद्भागवतकी प्राप्ति मुझे कैसे होगी॥ ५८॥
कलिं तु निग्रहीष्यामि तात ते वचसि स्थितः।
श्रीभागवतसम्प्राप्तिः कथं मम भविष्यति॥ ५८
राजा परीक्षित्ने कहा—हे तात! आपकी आज्ञाके अनुसार तत्पर होकर मैं कलियुगको तो अवश्य ही अपने वशमें करूँगा, मगर श्रीमद्भागवतकी प्राप्ति मुझे कैसे होगी॥ ५८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.58 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 1000) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/58/