श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.4.13

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

हंसः स्यात् सारमादत्ते यः श्रोता विविधाच्छ्रुतात्।

दुग्धेनैक्यं गतात्तोयाद् यथा हंसोऽमलं पयः॥ १३

haṃsaḥ syāt sāramādatte yaḥ śrotā vividhācchrutāt|

dugdhenaikyaṃ gatāttoyād yathā haṃso'malaṃ payaḥ|| 13

अर्थ

जैसे हंस दूधके साथ मिलकर एक हुए जलसे निर्मल दूध ग्रहण कर लेता और पानीको छोड़ देता है, उसी प्रकार जो श्रोता अनेकों शास्त्रोंका श्रवण करके भी उसमेंसे सारभाग अलग करके ग्रहण करता है, उसे ‘हंस’ कहते हैं॥ १३॥

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