तामस सेवन वह है जो कभी भूलसे छोड़ दिया जाय और याद आनेपर फिर आरम्भ कर दिया जाय, इस प्रकार एक वर्षतक आलस्य और अश्रद्धाके साथ चलाया जाय। यह ‘तामस’ सेवन भी न करनेकी अपेक्षा अच्छा और सुख ही देनेवाला है॥ २७॥
तामसं यत्तु वर्षेण सालसं श्रद्धया युतम्।
विस्मृतिस्मृतिसंयुक्तं सेवनं तच्च सौख्यदम्॥ २७
तामस सेवन वह है जो कभी भूलसे छोड़ दिया जाय और याद आनेपर फिर आरम्भ कर दिया जाय, इस प्रकार एक वर्षतक आलस्य और अश्रद्धाके साथ चलाया जाय। यह ‘तामस’ सेवन भी न करनेकी अपेक्षा अच्छा और सुख ही देनेवाला है॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.4.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 1005) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/4/27/