हस्तिनापुरकी कुलीन रमणियाँ, जिनका चित्त भगवान् श्रीकृष्णमें रम गया था, आपसमें ऐसी बातें कर रही थीं, जो सबके कान और मनको आकृष्ट कर रही थीं॥ २०॥✎ 7778
अन्योन्यमासीत्संजल्प उत्तमश्लोकचेतसाम्।
कौरवेन्द्रपुरस्त्रीणां सर्वश्रुतिमनोहरः॥ २०
हस्तिनापुरकी कुलीन रमणियाँ, जिनका चित्त भगवान् श्रीकृष्णमें रम गया था, आपसमें ऐसी बातें कर रही थीं, जो सबके कान और मनको आकृष्ट कर रही थीं॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.10.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 127) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/10/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)