श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.10.3

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

निशम्य भीष्मोक्तमथाच्युतोक्तं प्रवृत्तविज्ञानविधूतविभ्रमः ।

शशास गामिन्द्र इवाजिताश्रयः परिध्युपान्तामनुजानुवर्तितः ॥ ३

niśamya bhīṣmoktamathācyutoktaṃ pravṛttavijñānavidhūtavibhramaḥ |

śaśāsa gāmindra ivājitāśrayaḥ paridhyupāntāmanujānuvartitaḥ || 3

अर्थ

भीष्मपितामह और भगवान् श्रीकृष्णके उपदेशोंके श्रवणसे उनके अन्तःकरणमें विज्ञानका उदय हुआ और भ्रान्ति मिट गयी। भगवान्‌के आश्रयमें रहकर वे समुद्रपर्यन्त सारी पृथ्वीका इन्द्रके समान शासन करने लगे। भीमसेन आदि उनके भाई पूर्णरूपसे उनकी आज्ञाओंका पालन करते थे॥ ३॥

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