श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.10.7

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

उषित्वा हास्तिनपुरे मासान् कतिपयान् हरिः।

सुहृदां च विशोकाय स्वसुश्‍च प्रियकाम्यया॥ ७

uṣitvā hāstinapure māsān katipayān hariḥ|

suhṛdāṃ ca viśokāya svasuśca priyakāmyayā|| 7

अर्थ

अपने बन्धुओंका शोक मिटानेके लिये और अपनी बहिन सुभद्राकी प्रसन्‍नताके लिये भगवान् श्रीकृष्ण कई महीनोंतक हस्तिनापुरमें ही रहे॥ ७॥✎ 75 76

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #75 शब्दोंके बीचका स्थान: कोदेखते → को देखते
  • #76 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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