श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.10.9

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

सुभद्रा द्रौपदी कुन्ती विराटतनया तथा।

गान्धारी धृतराष्ट्रश्‍च युयुत्सुर्गौतमो यमौ॥ ९

subhadrā draupadī kuntī virāṭatanayā tathā|

gāndhārī dhṛtarāṣṭraśca yuyutsurgautamo yamau|| 9

अर्थ

उस समय सुभद्रा, द्रौपदी, कुन्ती, उत्तरा, गान्धारी, धृतराष्ट्र, युयुत्सु, कृपाचार्य, नकुल, सहदेव, भीमसेन, धौम्य और सत्यवती आदि सब मूर्च्छित-से हो गये। वे शार्ङ्गपाणि श्रीकृष्णका विरह नहीं सह सके॥ ९-१०॥✎ 75 76

यह अर्थ श्लोक 9–10 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #75 शब्दोंके बीचका स्थान: कोदेखते → को देखते
  • #76 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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