श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.11.12

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

सर्वर्तुसर्वविभवपुण्यवृक्षलताश्रमैः ।

उद्यानोपवनारामैर्वृतपद्माकरश्रियम् ॥ १२

sarvartusarvavibhavapuṇyavṛkṣalatāśramaiḥ |

udyānopavanārāmairvṛtapadmākaraśriyam || 12

अर्थ

वह पुरी समस्त ऋतुओंके सम्पूर्ण वैभवसे सम्पन्‍न एवं पवित्र वृक्षों एवं लताओंके कुंजोंसे युक्त थी। स्थान-स्थानपर फलोंसे पूर्ण उद्यान, पुष्पवाटिकाएँ एवं क्रीडावन थे। बीच-बीचमें कमलयुक्त सरोवर नगरकी शोभा बढ़ा रहे थे॥ १२॥✎ 79

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #79 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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