श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.11.13

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

गोपुरद्वारमार्गेषु कृतकौतुकतोरणाम्।

चित्रध्वजपताकाग्रैरन्तः प्रतिहतातपाम्॥ १३

gopuradvāramārgeṣu kṛtakautukatoraṇām|

citradhvajapatākāgrairantaḥ pratihatātapām|| 13

अर्थ

नगरके फाटकों, महलके दरवाजों और सड़कोंपर भगवान्‌के स्वागतार्थ बंदनवारें लगायी गयी थीं। चारों ओर चित्र-विचित्र ध्वजा-पताकाएँ फहरा रही थीं, जिनसे उन स्थानोंपर घामका कोई प्रभाव नहीं पड़ता था॥ १३॥✎ 79

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #79 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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