नगरके फाटकों, महलके दरवाजों और सड़कोंपर भगवान्के स्वागतार्थ बंदनवारें लगायी गयी थीं। चारों ओर चित्र-विचित्र ध्वजा-पताकाएँ फहरा रही थीं, जिनसे उन स्थानोंपर घामका कोई प्रभाव नहीं पड़ता था॥ १३॥✎ 79
गोपुरद्वारमार्गेषु कृतकौतुकतोरणाम्।
चित्रध्वजपताकाग्रैरन्तः प्रतिहतातपाम्॥ १३
नगरके फाटकों, महलके दरवाजों और सड़कोंपर भगवान्के स्वागतार्थ बंदनवारें लगायी गयी थीं। चारों ओर चित्र-विचित्र ध्वजा-पताकाएँ फहरा रही थीं, जिनसे उन स्थानोंपर घामका कोई प्रभाव नहीं पड़ता था॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.11.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 131) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/11/13/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)