पौत्रके जन्मकी बात सुनकर राजा युधिष्ठिर मनमें बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने धौम्य, कृपाचार्य आदि ब्राह्मणोंसे मंगलवाचन और जातकर्म-संस्कार करवाये॥ १३॥
तस्य प्रीतमना राजा विप्रैर्धौम्यकृपादिभिः।
जातकं कारयामास वाचयित्वा च मङ्गलम्॥ १३
पौत्रके जन्मकी बात सुनकर राजा युधिष्ठिर मनमें बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने धौम्य, कृपाचार्य आदि ब्राह्मणोंसे मंगलवाचन और जातकर्म-संस्कार करवाये॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.12.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 136) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/12/13/