श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.12.15

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

तमूचुर्ब्राह्मणास्तुष्टा राजानं प्रश्रयान्वितम्।

एष ह्यस्मिन् प्रजातन्तौ पुरूणां पौरवर्षभ१॥ १५

tamūcurbrāhmaṇāstuṣṭā rājānaṃ praśrayānvitam|

eṣa hyasmin prajātantau purūṇāṃ pauravarṣabha|| 15

अर्थ

ब्राह्मणोंने सन्तुष्ट होकर अत्यन्त विनयी युधिष्ठिरसे कहा—‘पुरुवंशशिरोमणे! कालकी दुर्निवार गतिसे यह पवित्र पुरुवंश मिटना ही चाहता था, परन्तु तुमलोगोंपर कृपा करनेके लिये भगवान् विष्णुने यह बालक देकर इसकी रक्षा कर दी॥ १५-१६॥

यह अर्थ श्लोक 15–16 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—पौरवर्षभः।

    (मुद्रित पृष्ठ 137)

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